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Hemraj sarswat

क्यों बेचैन था मेरा मन शाम होते होते पुरवाई आयी! मिलने वाले मिलते गए पर रुसवा किसी के चेहरे पर ना थी!! .......... ................. नम आंखों से मेरी मां को रोते देखा मन मेरा बेचैन था! सब्र का बांध मेरा ...