Hemraj sarswat लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप - जनवरी 02, 2019 क्यों बेचैन था मेरा मन शाम होते होते पुरवाई आयी! मिलने वाले मिलते गए पर रुसवा किसी के चेहरे पर ना थी!! .......... ................. नम आंखों से मेरी मां को रोते देखा मन मेरा बेचैन था! सब्र का बांध मेरा ... और पढ़ें