(आमा रस भूनोडो आम सत सू उगो ~राजस्थानी कथा)
तू है मालन धर्म की बाई ' इद की बात पूछ पूछन ने आई। इद की बात को भयो हे अच्मभो' किस बिध उगेगो भुनोडो आमो!! पिली माटी- गंगाजल पाणी' सूर्या धेन रो गोबर लानी! दे चोको करी चतुराई ' गुठली घोल मझोल घोलाई!! उगे आम उपनी आशा ' तो दया करी है आया है गुरु दुर्वशा! (१) ॐ सत भाखे माता कूंता ' हकरी बात सांभालों पूता! केरवा कपुता करी करुरी ' तो पहले परचे पड़सी पूरी!! धरती तना मोय हाथ समोहा ' मामे बीती सी मेही बतावा! बालक बेष बंदो चंद भरनी' पुर्ख लिख्या जद ही अन पर्णी!! दांतन करती बैठ द्वारे ' लोभ लालच नहीं हो म्हारे! मल करती हाथा मंजन ' ना कोई आभो ना कोई अंजन!! वस्त्र हीन में किया सपड़ा' तो दृष्टा रा लोहिन लग्य हमारा! मोहि सुत का बोजस बाना ' तो ऊंचा हरख तपे आस~माना!! में गई ना म्हारे सूरज आयो ' तो कलंक लग्यो है बिना कमायो! सता पराक्रम छापन छड़यो' कान द्वार सु करण कड़ यो!! कर्ण जनम्या जद प्राण कुंवारा ' नूकलो शहदेव मादिर्का तीन हमारा! पांच पांडव री माता भिनज्यू ' पिंड राजा रे घर निया सनज्या!! पिंड राजा बिन पुरुष न जाण्यो ' असली जीव...