( तुम जो ना आते )
सजना हम तुम एक है। नैनों का बड़ा है कसूर। बाता लागी काल्जा मौज दिलां दी होय।। ...................... ऐसी काई पितलड़ी लगाई म्हारी जानू ए म्हाने एकला ने छोड़या म्हारे दिल ने तू तोड़ा कह्या भूल गई।। .................... हीवड़े सु अलग थाने राख्या ए म्हारी जानू ए थासू प्रीत में लगाई म्हारे दिल में तने बसाई कैसे भूल गई।। ................... एड़ी काई प्रीत तू लगाई ए म्हारी जानू ए .................... पतली सी कमरीया थारी जानू ए म्हारे साथ बिताई कुछ वो राता ए म्हारी जानू ए कैसे भूल गई।। #कवि हेमराज सारस्वत लालामदेसर मगरा