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फ़रवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Hemraj sarswat

वो मुझे मेंहदी लगा हाथ दिखाकर रोई में किसी और की हूं इतना बता कर रोई! ................. में हैरान था उसकी ये बाते सुनकर मेरी नज़रे झुकने लगी थी तो मुझसे नज़रे मिलाकर रोई! ................ शायद मेरा पागलप...

Hemraj sarswat

वो तन्हा मंजर था जो देखा था हमने पीपल के पत्ते गिर रहे थे कसूर किसका था! शायद कसूर हवाओं का था या बेदर्द पतझड़ का था फिर भी जा जाने क्यों वो सितम किसका था!! ............ ...................... बड़ी रुस्तम वो ...