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💔आखिर_मुस्कराई_वो finally she smiled💔

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"भरी_महफिल_में_हस्ती_मिटाई_उसने_मेरी "सफर_जिंदगी_का_निभानें_का_किया_था_उसने_वादा "यूं_हमसफर_का_पलट_जाना_खुदा_भी_खुद_हैरान_था" बात 2016की है। मेरी जिंदगी में एक खूबसूरत सा पड़ाव आया  मुझे भी मोहब्बत होने लगी थी शायद मेरा पहला खुमार था इश्क का एक भोली सी हसीन सी अफसरा सी लड़की नाम था शारदा जब हमने पहली दफा देखा तो ऐसा लगा मानों मेरा जमीन आसमां वो ही है। उसकी और मेरी एक छोटी सी मुलाकात हुई जिससे हमारा प्यार और गहरा होने लगा "चांद_सी_होगी_वो_या_कोई_सितारा_होगी "हमनें_दिल_क्या_हारा "कत्ल_तो_होना_लाज़मी_था 13जुलाई को हम सफर से हमसफर बन गए सब कुछ अच्छा बीत रहा था बस कुछ दिनों में घर में नए महमान की त्यारी होने लगी थी सब खुश दिख रहे थे  पर उस खुशी के पीछे एक साजिश की परछाई सी आने लगी थी जब प्यार गहरा होने लगता है।तो बाहर वालें कुछ नहीं करते अपने होते है।वो ही साजिश का अंजाम देते है। मेरे साथ भी वो ही होने वाला था क्यों की हम सच्चाई की आवाज उठाते थे "सूरज_को_रोशनी_मोहताज_नहीं "चांद_भी_रोशनी_देता_है_रातों_को "हम_खुद_का_बखान_कैसे_करें "क्यों_...

💔 जज्बातों का कत्ल 💔

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कहते है।अगर इश्क अधूरा होता है। तो कुछ भी करो  वो अधूरा ही रह जाता है। बात कुछ सालों पहले की है। शारदा नाम था उस बेवफा का  मेरा प्यार कैसा था ये में जानता हु। या मेरा रब 17जून को हम एक दूसरे के हो गए। सात फेरों की रस्में और अग्नि को साक्षी मान कर (तुम कितना चाहो उस दीदार को अगर उसने इश्क का साथ ना दिया तो) एक साल तक हम राजी खुशी रहे। फिर उसने ना जाने मुझसे वफा क्यों नही की उसकी हर सांस मेरे लिए कीमती थी उसका दर्द ही मेरा दर्द था एक पल भी   उसके बिना रह नहीं सकता था में फिर भी उसने बेवफाई क्यों की ये उसकी फितरत ही ऐसी थी आज मामला कोर्ट में था तीन साल से अलग थी वो ना जाने इतना दर्द क्यों दिया उसने मुझको उसका हर जख्म मेरा था फिर भी उसने बेवफाई की तुम अपने प्यार को ज्यादा मत चाहना क्यों प्यार ही बेवफा का कारण था मेरा प्यार मेरा सपना सबका कत्ल करके वो चली गई क्यों की वो बेवफा थी बेवफा होती है ना  वो किसी की भी नही होती है।............ #हेमराज सारस्वत

{एक अजनबी सी मुलाकात}

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आज में बहुत खुश था। और होता भी क्यों नहीं आज मेरी जिंदगी की पहेली नौकरी जो लगी थी मुंबई मे दादर की टाटा टेली मे आज मे बहुत खुश था आज मेरा पहला दिन था ऑफिस में सारा काम निपटा के 6:20 को ट्रेन पकड़ नी थी जल्दी से ऑफिस से निकल कर ऑटो किया और आ गया दादर रेल्व स्टेशन  ट्रेन का टाइम हो गया था जल्दी से टिकट बुक किया और आ गया ट्रेन में बहुत भीड़ थी  मे अपने नजरे दौड़ा ही रहा था मेरी नजर एक खाली सीट पे पड़ी जिसमे एक लड़की बैठी हुई थी। मैंने धीरे से कहा जी मैडम ये सीट खाली है।तब उसने मुस्करा के कहा जी हा ये सीट खाली है। मुझे बहुत शर्म आ रही थी। शायद में माया नगरी में नया था फिर भी मैंने हिम्मत करके उस लड़की से पूछा जी मैडम आपका नाम उसने मेरे सामने देखा और मुस्कराई जी मेरा नाम सबनम अंसारी है। मे दादर मे जॉब करती टीसीएस मे फिर उसने मुझसे सवाल किया जनाब आप बड़े शर्मीले लगते हो कहा जा रहे हो आप मैंने फिर हिम्मत करके जी मैडम थाने बेस्ट जा रहा हूं। और आप उसने कहा वाउ मे भी थाने बेस्ट ही जा रही हूं बस हमारी बातचीत शुरू भी हो गई ना जाने कब थाने बेस्ट आ गया और पता भी नहीं चला। बस हमा...

(आमा रस भूनोडो आम सत सू उगो ~राजस्थानी कथा)

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तू है मालन धर्म की बाई ' इद की बात पूछ पूछन ने आई। इद की बात को भयो हे अच्मभो' किस बिध उगेगो भुनोडो आमो!! पिली माटी- गंगाजल पाणी' सूर्या धेन रो गोबर लानी! दे चोको करी चतुराई ' गुठली घोल मझोल घोलाई!! उगे आम उपनी आशा ' तो दया करी है आया है गुरु दुर्वशा! (१) ॐ सत भाखे माता कूंता ' हकरी बात सांभालों पूता! केरवा कपुता करी करुरी ' तो पहले परचे पड़सी पूरी!! धरती तना मोय हाथ समोहा ' मामे बीती सी मेही बतावा! बालक बेष बंदो चंद भरनी' पुर्ख लिख्या जद ही अन पर्णी!! दांतन करती बैठ द्वारे ' लोभ लालच नहीं हो म्हारे! मल करती हाथा मंजन ' ना कोई आभो ना कोई अंजन!! वस्त्र हीन में किया सपड़ा' तो दृष्टा रा लोहिन लग्य  हमारा! मोहि सुत का बोजस बाना ' तो ऊंचा हरख तपे आस~माना!! में गई ना म्हारे सूरज आयो ' तो कलंक लग्यो है बिना कमायो! सता पराक्रम छापन छड़यो' कान द्वार सु करण कड़ यो!! कर्ण जनम्या जद प्राण कुंवारा ' नूकलो शहदेव मादिर्का तीन हमारा! पांच पांडव री माता भिनज्यू ' पिंड राजा रे घर निया सनज्या!! पिंड राजा बिन पुरुष न जाण्यो ' असली जीव...

( तुम जो ना आते )

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सजना हम तुम एक है। नैनों का बड़ा है कसूर। बाता लागी काल्जा मौज दिलां दी होय।। ...................... ऐसी काई पितलड़ी लगाई म्हारी जानू ए म्हाने एकला ने छोड़या म्हारे दिल ने तू तोड़ा कह्या भूल गई।। .................... हीवड़े सु अलग थाने राख्या ए म्हारी जानू ए थासू प्रीत में लगाई म्हारे दिल में तने बसाई कैसे भूल गई।। ................... एड़ी काई प्रीत तू लगाई ए म्हारी जानू ए  .................... पतली सी कमरीया थारी जानू ए म्हारे साथ बिताई कुछ वो राता ए म्हारी जानू ए कैसे भूल गई।। #कवि हेमराज सारस्वत    लालामदेसर मगरा

{ मै हिन्दू हूं }

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हम हिन्दू है और मेरा रक्त का कतरा कतरा रमा है। हिंदुत्व में हमे क्या मिटा पायेगी उन जिहादियों की नस्ले क्यों की मेरी हर रक्त की बूंद पर पैदा होगी हिन्दुत्व की फसलें।।१।। ............ ................ में हिन्दू है मेरा दिल भी बसा है इस मिट्टी में मेरा देश की इस माटी की कसम ना मिटने दूंगा हिंदूत्व।।२।। .......... ............. मेरी पहचान है  भगवा रंग से  तिलक लगा हुआ है। चन्दन का सर पर जय श्रीराम का धवन है मेरे मुख से।।३।। ........... .............. बहुत आए हमे मिटाने कभी हम शिवाजी बनके  कर दिया संगार हमने  उन मुगलों का जिसने की कोशिश हम मिटाने।।४।। #कवि हेमराज सारस्वत

{ उनकी तन्हाई की रात }

दिल की बात सुन कर  हम अपने टूटे हुवे दिल से पुछा ऐ दिल बता कोनसी खता हो गई मुझसे मेरे हमसफर की तन्हाई की वजह बता।।१।। ............ ............... कितना भी चाहलों तुम अपने  हमसफर को तुम्हारी चाहत को वो ना समझेगी क्यों की जिस दिल को तुमने चाहा था वो दिल सिर्फ चंद लम्हों का था।।२।। ............. ................. बहुत करली फिक्र उस दिल की जो तुम्हारे ज़ज्बातों का सिर्फ कलमा था पास होके भी पास ना होना  उस हमसफर की क्या तन्हा होगी।।३।। ............... ................. तुम्हारे इश्क़ का दीपक उसने  ऐसा जलाएं आजतक जलती रही तुम्हारी आशिक़ी ऐ दिल तु वजह बता क्यों तन्हा है मेरी आशिक़ी।।४।। ............... ................... इन प्यार की वजह से कितना  दिल टूटा जल गई प्यार करने वालों की निशानियां ऐ दिल तु क्यों खफा है।जरा मुझे वजह बता।।५।। #कवि हेमराज सारस्वत