( तुम जो ना आते )

सजना हम तुम एक है। नैनों का बड़ा है कसूर।
बाता लागी काल्जा मौज दिलां दी होय।।
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ऐसी काई पितलड़ी लगाई म्हारी जानू ए
म्हाने एकला ने छोड़या म्हारे दिल ने तू तोड़ा
कह्या भूल गई।।
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हीवड़े सु अलग थाने राख्या ए म्हारी जानू ए
थासू प्रीत में लगाई म्हारे दिल में तने बसाई
कैसे भूल गई।।
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एड़ी काई प्रीत तू लगाई ए
म्हारी जानू ए 
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पतली सी कमरीया थारी जानू ए
म्हारे साथ बिताई कुछ वो राता ए म्हारी जानू ए
कैसे भूल गई।।
#कवि हेमराज सारस्वत
   लालामदेसर मगरा

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