Hemraj sarswat
वो आरजु हमारी थी
या मैरी पनाह थी
बहुत रोया है ये दिल जनाब मेरे आँखो के आँसू भी सुख गये है!
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क्या बताये हम अक्सर ये भुल जाते है हमारी मंजिल कहा है! कुछ लौग वो होते है जिनकी याद मे हम अक्सर अपनी ही मंजिल भुल जाते है!
बात १४फरवरी २०१४की है मेरी जिन्दगी मे
एक तन्हा जिन्दगी ने दस्तक दी
मानौ आज मे बहुत खुश था कि मैने कौई इश्क का पैगाम हासिल कर लिया
जब वो मुस्कराई तो मानौ शहर थम सा गया है मेरी आरजू की राहौ मे
मुझे सिर्फ वो ही नजर आ रही थी
ना मुझे हौश था ना हि दुनिया की परवाह! मे खौ सा गया था उसकी बाहौं मे
बड़े ही फुरसत से उसने नाम बताया था अपना 'घनप्रभा' और मुस्करा के चली गयी
"इस जिन्दगी मे तन्हाई बहुत है जनाब
अक्सर हम खौ जाते है अपनों के ही बनाये रास्ते पर"
फिर उसका Call आया मेरे पास वो इजहार करने लगी अपनी मौहब्बत का
हमने भी उनकी चाहत कबूल कर ली
फिर हमारे प्यार के तौते इस कदर उड़े कि आंसमा कि भी परवा ना थी हमे
खुले गंगन मे उड़ने लगे थे हम!
कहते है जनाब खुले आंसमा मे पंछी उड़ते है तो
शिकारी भी बहुत होते है
हमने आज अपनी मैना को खौ दिया और हम हरदम के लिये तन्हा हो गये!
"चाहत होती है जमाने मे जब रूस्वा दिल ना हो
अगर मान जाती हमारी अंधूरी महौब्बत तो आज उनकी तन्हा चाहत ना होती"
~हेमराज सारस्वत
लालमदेसर मगरा
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