Hemraj sarswat
बहुत दर्द था इस दिल मे
हम अपने लब्ज मे ब्यां नही कर सकते थे
पास आ कर उनका यू जाना
जैसे सावन मे लूं का साया था!!
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क्या लिखू मे इस छौटे से दिल मे
दर्द से भरा एक नगमा था
कितना तरफा होगा ये दिल
ये आपको भी मालूम होगा था!!
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लिख देते है लोग दिवारो पे
जैसे इश्क का कोई जनाजा था
अपनी नंशौ का लहू टंपका के देखो
इश्क का दर्द कितना गहरा होता है!!
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शरारत भी उस पुनम के चांद की थी
जिसने रात के साये मे तांरो से नफरत की
लिख देता है रब उसकी नशीयत
जिसने इश्क के नाम से खता की हो!!
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हमारे जनाजे मे कुछ चंद लोग आये
मानौ रूस्वा भी हमारे इश्क से थी
सब कुछ सहन करके भी हम
क्यू लगा जैसे हम विरान से शहर मे थे!!
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हमारी गजल के कुछ लब्ज
यू लौगो को समझ मे नही आंये होगे
लिख देते है हम अपनी दिल की आरजू
ये आपके दिल के भी राज होगे!!
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बड़ी सिद्घत से हम
अपने दिदार की चिराग जलाई थी
मानौ रूस्वा था वो मौसम
जिसने हम और हमारी तन्हाई पंसद ना थी!!
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#हेमराज सारस्वत
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